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नई दिल्ली: IPS अधिकारी का ओहदा और उसके महत्व के बारे में बताने की ज़रुरत नहीं हैं लेकिन कुछ आईपीएस अधिकारियों की कार्यशैली ऐसी होती है जो लोगों और शासन प्रशासन में अलग ही पहचान बना देते हैं, जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार कैडर के एक तेज-तर्रार और सीनियर आईपीएस अधिकारी शालिन की जिन्हें देश की सुरक्षा से संबंधित बड़ी जिम्मेवारी दी गई है.
गृह मंत्रालय के निर्णय के बाद राज्य सरकार ने सेंट्रल रेंज (पटना) के डीआईजी शालीन को विरमित कर दिया है. 5 वर्षों तक वे एनएसजी (नई दिल्ली) में डीआईजी की जिम्मेवारी संभालेंगे.
शालीन प्रधानमंत्री के सुरक्षा दस्ता एसपीजी में रह चुके हैं
गौरतलब है कि 2001 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अफसर शालीन वर्ष 2008 से 2014 तक प्रधानमंत्री के सुरक्षा दस्ता एसपीजी में रह चुके हैं. इस दौरान वे दो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (पूर्व) पीएम नरेंद्र मोदी के आंतरिक सुरक्षा घेरे के इंचार्ज थे. उन्हें एसपीजी के तेजतर्रार अधिकारियों में गिना जाता था. 
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एसपीजी से वापस बिहार आने के बाद पहले उन्हें गया के डीआईजी फिर पटना के सेंट्रल रेंज की जिम्मेवारी मिली थी.
शालिन का काम करने का अंदाज़ है जुदा
शालिन की पहचान पटना की ट्रैफिक अभियान को दुरुस्त करने वाले अधिकारी के रूप में भी होती है. राजधानी के ट्रैफिक व्यवस्था की कमान संभालते हुए उन्होंने सड़कों पर पुलिसिया घेराबंदी कर लहरिया बाइकर्स को खदेड़ा तो बिना हेलमेट बाइक ड्राइविंग पर रोक लगाई.
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बतौर पटना रेंज डीआईजी शालिन ने पटना समेत आसपास के इलाकों में बिल्डिंग निर्माण से जुड़े माफियाओं के खिलाफ शालिन ने शिकंजा कसा तो कईयों पर कार्रवाई भी की. पटना में फ्लैट के नाम पर जालसाजी करने वाले बिल्डरों के खिलाफ भी उन्होंने मुहिम छेड़ी. 
कई पुलिसकर्मियों को एक साथ लाईन हाजिर कर दिया था
पटना पुलिस पर पैसे लेकर शराब माफियाओं को छोड़ने के आरोप लगे तो मामले में बड़ी कार्रवाई की. इसी साल के फरवरी महीने सेंट्रल रेंज के डीआईजी शालीन ने माफियाओं को पैसे लेकर छोड़ने के मामले में पूरे थाने को आरोपी मानते हुए सभी पुलिसकर्मियों को एक साथ लाईन हाजिर कर दिया था. 
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इसी साल मकर संक्रांति के दिन पटना में हुए नाव हादसे जिसमें करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो गई थी की जांच का जिम्मा भी शालिन को मिला था. टीम मे शालिन समेत अन्य अफसर भी शामिल थे जिन्होंने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसके आलोक में अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी.
लिखा था लेख जिसकी हुई थी खासी चर्चा-
'मैं तो एक 'बेकार' पंजाबी मुंडा था, 'बिहारी गैंग' ने डूबने से बचाया'
बिहार का अतीत काफी सुनहरा रहा है, वर्तमान में कुछ लोगों की वजह से बिहार के बाहर बिहारियों के प्रति लोगों की धारण बदल गई थी. लेकिन बिहार कैडर के एक IPS अधिकारी के इस लेख ने फिर से बिहारियों प्रति लोगों की धारना को बदलने को मजबूर कर दिया.
गुरु गोविंद सिंह के जयंती पर पटना 350वें प्रकाशोत्सव का आयोजन हुआ था. इस आयोजन के दौरान ब्रांड बिहार की झलक पूरी दुनिया ने देखी है. पंजाब से आने वाले लोग बिहार के लोगों को सलाम कर रहे थे. व्यवस्था देख सब लोग एक सुर-सुर में वाह-वाह कर रहे थे. इसी फीलिंग को पटना के डीआईजी शालीन ने अपने लेख के माध्यम से की है. शालीन मूलत: पंजाब के रहने वाले हैं. 
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शालीन ने लिखा है कि 'प्रकाश पर्व' जिसमें विश्व के कोने-कोने से सिख समुदाय हफ्ते तक पटना के आगंतुक रहे, इसके सफलता पूर्वक समापन के बाद, एक पंजाबी और साथ-साथ बिहार क़ैडर के पुलिस अफ़सर होने के कारण अपनी व्यक्तिगत और प्रोफ़ेशनल ख़ुशी दोनों को रोक नहीं पा रहा. भावनाएं बह रही है. ह्रदय से पूरे बिहार को नमन कर रहा हूं. 
बात बीस साल पहले की है. आईआईटी रूड़की के विद्यार्थी के रूप में फ़ाइनल ईयर में 'बिहारी गैंग' से परिचय हुआ. उसके पहले दिल्ली, कानपुर, लखनऊ इत्यादि के दोस्तों से उनके अलग-अलग प्रतिभा से अवगत हो चुका था. किसी ग्रुप में खेल कूद में ख़ुद को कमज़ोर पाया तो कहीं ख़ुद के अंदर अमेरिका जाने की ज्वाला कम पाया. जीवन में एक नीरसता थी, ना तो किसी स्पोर्ट्स क्लब का मेंबर ना ही कोई ड्रामा सोसाइटी में दिलचस्पी. पढ़ाई भी सुभानअल्लाह थी. इसी उधेड़बुन में मैं 'बिहारी गैंग' में शामिल हुआ. शायद, मुझे स्वीकार करना बिहार के स्वभाव में था.
याद रहे, बिहार का छठ पर्व पूरे विश्व में अकेला पर्व है जहां डूबते सूर्य को भी पूजा जाता है और मैं अपनी और कैम्पस की नज़र में एक डूबता सूर्य ही था. फिर बिहार के उस ग्रुप को बाक़ी के बचे दिनों में बहुत एंज्वाय किया. 
पास करने के बाद मैं एक मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में एक साल के लिए नौकरी किया लेकिन मेरे 'बिहारी गैंग' के दोस्त कैम्पस में मिली अपनी-अपनी नौकरी छोड़ भारत प्रसिद्ध 'जिया सराय' पहुंच सिविल सर्विसेज़ की तैयारी को पहुंच चुके थे. मुझे वहां देख सभी ना सिर्फ़ प्रसन्न हुए बल्कि पूरे दिल से पुनः स्वागत किया. कहते हैं कि सिविल सर्विसेज़ के लिए कड़ी मेहनत, ज़बरदस्त इरादा इत्यादि इत्यादि होना चाहिए और मैं वो सारे गुण आईआईटी रूड़की के कैम्पस में खो चुका था.
कई बार हताशा के दौर में जिया सराय के उन बंद कमरों में  न घबराता था, तब सामने आते थे वही बिहारी गैंग के दोस्त. मेरा दोस्त राघवेंद्र नाथ झा जो मुझे हर पल मेरी मंज़िल की ओर मुझे इशारा करता और उस मंज़िल को पाने का बुलंद हौसला उन्हीं दोस्तों से मिलता था. कैसे भूल सकता हूं उस दौर को जिसका हर पल आज के मेरे वर्तमान में शामिल है. 
मेरा सेलेक्शन IPS में हो गया और नसीब देखिए, मुझे बिहार क़ैड़र ही मिला. वर्षों यहां काम करने के बाद मुझे पता चला कि जैसे आप एक 'निर्भया' के चलते पूरे उत्तर भारतीय पुरुषों को ग़लत नहीं कह सकते , 'कावेरी' के चलते सभी बेंगलुरु वालों को बस जलाने वाला नहीं कह सकते, ठीक उसी तरह बिहार में कुछ अपराधों के चलते सभी बिहारी को उसी रंग में रंग नहीं सकते. 
यह मेरा पुरज़ोर मानना है की औसत बिहारी की 'इंटेलेक्ट' सामान्य लोगों से ज़्यादा होती है  बिहारी स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं . हां, बिहारी जातिवाद को लेकर एक ज़िद में होते हैं और इंसान के गुण- अवगुण जाति आधारित करते हैं जो कई बार हम जैसों को ताज्जुब भी कर जाता है लेकिन शायद यह जातिवाद ही है जो उनके अन्दर बिहारीवाद की जगह भारतीयता भरता है क्योंकि बिहार छोड़ते ही उनका जातिवाद भी ख़त्म हो जाता है. 
बिहार के बाहर बिहारी विश्व के किसी भी कोने में वहां की सभ्यता और संस्कृति को बड़े ही आदर से स्वीकार करते हैं, चाहे वो आईआईटी का कैम्पस हो या चेन्नई या बंगलोर, उस ख़ास ग़ैर बिहार को अपना जगह मानने लगते हैं. अपनी बोली को बरक़रार रखते हुए उस ग़ैर बिहार मिट्टी में ख़ुद को समा देते हैं. कई बार ग़ैर बिहारी बिहारियों के इस जज़्बे को सलाम नहीं कर पाते. करना चाहिए, तब जब वह बिहारी पटना / भागलपुर के विकास को दरकिनार कर आपके शहर के विकास में लगा हुआ है. 
बिहारी में 'कलेजा' बहुत होता है, कुछ खोने का भय नहीं होता . एक उदाहरण देता हूं, मेरे बैच के दूसरे IPS नजमल होदा ट्रेनिंग के दौरान सीनियर अफ़सर से ऐसे ऐसे सवाल पूछते की वहीं उनके साथ बैठा मैं हैरान हो जाता. क्या कोई ऐसे सवाल भी पूछ सकता है. कुछ ऐसा ही यहां के पत्रकारों के साथ भी है. आप प्रेस कॉफ्रेंस में हैं और अचानक से आपका पत्रकार दोस्त जो थोड़ी देर पहले आपके साथ चाय पी रहा था, आप पर ही सवालों की लड़ी / झड़ी लगा देगा. आपको बख्शने के मूड में नहीं होगा. 
यूं ही मजाक के तौर पर नौकरी के शुरूआती दौर में जब कभी अपने IPS दोस्तों को फोन करता तो उधर से जबाब आता था, 'साहेब, अभी खाना खा रहे हैं या 'नहा' रहे हैं'. बिहारी भाई लोग नहाने और खाने में बहुत समय लेते हैं. पहले तो मै आश्चर्य में रहता था अब समझ चूका हूं. 
हां, बिहार और बिहारी अपनी कुछ समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन भारतीयता में कभी कोई कमी नहीं है. विशाल हृदय में हर किसी के लिए जगह है तभी तो मेरे जैसा एक पंजाबी भी यहां बड़े ठाठ आपके ह्रदय में बैठा है. गुरु गोविंद सिंह महाराज के 350 वां जन्म समारोह को बिहारी समुदाय दिल से मना कर पूरे विश्व के पंजाबी बिरादरी को चकित कर सबके चेहरे पर एक मुस्कान ला दिया. 
source zee news

पटना : सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों का पार्थिव शरीर ले जाने वाले ट्रक को रोके जाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना हो रही है. दरअसल, इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें सुकमा नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों का पार्थिव शरीर ले जा रहे वाहन को कथित रूप से इसलिए रोक कर रखा गया क्योंकि वहां से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफिला गुजरने वाला था. सीएम का काफिला गुजरने के बाद पार्थिव शरीर ले जा रहे ट्रक को जाने की अनुमति दी गई. यह घटना मंगलवार की है. 
इंटरनेट पर इस वीडियो के वायरल होने पर भाजपा नेता सुशील मोदी ने इसकी आलोचना की है.  
  एयरपोर्ट नहीं पहुंचा कोई नेता
नीतीश कुमार पर विपक्ष के नेताओं ने शहीदों के पार्थिव शरीर के आने पर एयरपोर्ट पर किसी कैबिनेट मंत्री के न रहने का भी आरोप लगाया है.


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Sushil Kumar Modi 
@SushilModi
Nitish was enjoying movie instead of going to airport to pay his respect to Sukma martyrs.Neither his Min went toairport

मंगलवार शाम सुकमा नक्सल हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों का पार्थिव शरीर एयरपोर्ट से लाया जा रहा था. उसी वक्त एयरपोर्ट के पास से नीतीश कुमार एक कार्यक्रम से होकर गुजर रहे थे. हमेशा की तरह रास्ते में सीएम के काफिले में कोई व्यवधान न पड़े इसलिए शहीदों के पार्थिव शरीर को ले जा रहे ट्रक को बीच रास्ते में रोक दिया गया. 
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नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीते रविवार को हुए चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं. ताजा नतीजों में 6 सीटों पर भाजपा को जीत मिल चुकी है. रुझान में भाजपा को भारी जीत मिलती दिख रही है. 182  सीटों पर भाजपा आगे चल रही है, 38 सीटों पर कांग्रेस और 39 सीटों पर आम आदमी पार्टी आगे चल रही है. 11 सीटें अन्य के खाते में जाती दिख रही है.    
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम- 104 सीटें
भाजपा- 70 सीटों पर आगे
कांग्रेस- 13 सीट पर आगे
आप- 16 सीटों पर आगे
अन्य- 5 सीटों पर आगे
उत्तरी दिल्ली नगर निगम- 103 सीटें
भाजपा- 72 सीटों पर आगे
कांग्रेस- 14 सीट पर आगे
आप- 14 सीट पर आगे
अन्य- 3 सीटों पर आगे
पूर्वी दिल्ली नगर निगम- 63 सीटें
भाजपा- 40 सीटों पर आगे
कांग्रेस- 11 सीटों पर आगे
आप- 9 सीटों पर आगे
अन्य- 3 सीट पर आगे
- आम आदमी पार्टी के बड़े मंत्रियों के इलाके में जीत रही है भाजपा.
- दिल्ली में दोबारा चुनाव करवाएं अरविंद केजरीवाल : महाबल मिश्रा
- दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के पटपड़गंज इलाके में भी आप की बड़ी हार.
- भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से मांगा इस्तीफा.
- भाजपा नेता शाहनवाज बोले- आप ने जनता की उम्मीदों पर झाडू फेर दिया.
- आप नेता कपिल मिश्रा ने कहा- जनता की आवाज भगवान की आवाज है. 
राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके श्रीवास्तव ने मतगणना की तैयारियां पूरी कर लिये जाने की जानकारी देते हुए बताया कि तय कार्ययोजना के मुताबिक मतगणना सुबह 8.00 बजे शुरू हो जायेगी. सीलबंद ईवीएम मतगणना स्थलों पर पहुंचा दी गई हैं. इसके लिए 35 मतगणना केन्द्र बनाए गए हैं. एमसीडी में 272 सीटें हैं लेकिन दो जगहों पर उम्मीदवारों के निधन के चलते 270 सीटों पर चुनाव हुए थे.
रविवार (23 अप्रैल) को 53.58 प्रतिशत मतदान हुआ था जो कि साल 2012 के चुनाव में हुए मतदान से थोड़ा ज्यादा है. चुनाव के तीनों प्रमुख दावेदार भाजपा, आप और कांग्रेस, अपने पक्ष में चुनाव परिणाम आने का दावा कर रहे हैं. इस बीच मतदान के बाद हुए एक्जिट पोल में चुनाव परिणाम में भाजपा को अप्रत्याशित जीत मिलने की संभावना जतायी गई है.
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जानकारों की राय में निगम चुनाव का परिणाम दिल्ली के सियासी भविष्य को तय करने वाला साबित होगा. एक तरफ दो साल पहले हुये विधानसभा चुनाव में 67 सीट जीतने वाली आप के लिये निगम चुनाव परिणाम पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के जनाधार की मजबूती को तय करेगा, वहीं कांग्रेस और भाजपा के लिये चुनाव का परिणाम दिल्ली में खोई जमीन वापस पाने का पैमाना बनेगा.
हालांकि मतदान से महज दस दिन पहले 13 अप्रैल को राजौरी गार्डन विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव परिणाम में आप की करारी हार केजरीवाल कैंप के लिये चिंता बढ़ाने वाली साबित हुई जबकि भाजपा अपनी जीत और कांग्रेस अपने मत प्रतिशत में 23 प्रतिशत इजाफे से काफी उत्साहित है. यह बात दीगर है कि केजरीवाल ने उपचुनाव परिणाम को निगम चुनाव का ट्रेलर मानने से इंकार कर दिया। साथ ही वह निगम चुनाव के एक्जिट पोल के परिणाम सही साबित होने पर ईवीएम के खिलाफ आंदोलन तक शुरू करने की चेतावनी भी दे चुके हैं.
दिल्ली के 1.32 करोड़ मतदाताओं में से 7139994 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसमें सर्वाधिक मतदान दक्षिणी दिल्ली में रहा. इस क्षेत्र के 2687685 मतदाताओं ने वोट डाला जबकि उत्तरी दिल्ली निगम में 2680011 और पूर्वी निगम में 1772298 मतदाताओं ने मतदान किया.
source zee news

 पटना [जेएनएन]। दिल्ली एमसीडी चुनाव में हुई वोटिंग की आज सुबह से गिनती जारी है। दिल्ली में शीर्ष पार्टी आप और कांग्रेस के बीच दूसरे नंबर को लेकर मुकाबला है वहीं बीजेपी दोनों पार्टियों को मात देकर लगातार बढत बनाई हुई है।
वोटिंग दिल्ली में जारी है लेकिन बिहार मे इसे लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। हम के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि लोग वार्ड का चुनाव तो जीत नहीं सकते, लेकिन प्रधानमंत्री बनने का सपना देखतें हैं।
वहीं चुनाव के नतीजों पर राजद के प्रवक्ता मनोज झा ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी अपनी करनी का खामियाजा भुगत रही है।
जदयू नेता श्याम रजक ने कहा कि दिल्ली एमसीडी चुनाव के नतीजों से अब सबक लेने की जरूरत है। अब सबको एक साथ आना चाहिए। जब हम बिहार में एक हुए तभी हमने जीत हासिल की और बीजेपी को हराया है। जहां हम अलग लड़े वहां हमें हार का मुंह देखना पड़ा है।
सीएम नीतीश ने दिल्ली में किया था रोड शो
दिल्ली नगर निगम चुनाव में जदयू उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो दिनों तक चुनाव प्रचार किया था। 9 और 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने रोड शो के साथ ही जनसभा को भी संबोधित किया था।
दिल्ली नगर निगम चुनाव में जदयू पूरे दमखम के साथ जुटा रहा था। पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए बिहार से जदयू के कई नेता, मंत्री, विधायक व विधान पार्षद भी डटे हुए थे। 

source jagran

बिहार के गया में है 2650 साल पुराना यह बोधिवृक्ष. बोधिमंदिर सहित इस वृक्ष की सुरक्षा में बिहार मिलिट्री पुलिस की चार बटालियन (करीब 360 जवान) तैनात हैं. इसकी टहनियां इतनी विशाल हैं कि इसे लोहे के 12 पिलर के सहारे खड़ा किया गया है. 
संभवत: यह देश का पहला वृक्ष है, जिसके दर्शन के लिए हर साल 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. इनमें से 1.5 लाख से अधिक विदेशी होते हैं. 
141 साल पहले यानी साल 1876 में महाबोधि मंदिर के जीर्णोद्धार के समय एलेक्जेंडर कनिंघम ने इस वृक्ष को लगाया था. इस दौरान खुदाई में लकड़ी के कुछ अवशेष भी मिले, जिन्हें संरक्षित कर लिया गया. 
बाद में 2007 में इस वृक्ष, लकड़ी के अवशेष सम्राट अशोक द्वारा श्रीलंका (अनुराधापुर) भेजे गए बोधिवृक्ष का डीएनए टेस्ट कराया गया. पता चला कि यह वृक्ष उसी वृक्ष के मूल से निकला है, जिसके नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था. 
भास्कर में छपी ख़बर के मुताबिक इसे स्वस्थ रखने के लिए साल में चार बार जांच होती है. नए पत्तों की संख्या सघनता से पता लगाया जाता है कि वृक्ष स्वस्थ है या नहीं. फिर उसी आधार पर इलाज होता है. वृक्ष की पुरानी टहनियां काटकर उस पर रासायनिक लेप चढ़ाया जाता है. 
कीटों से बचाने के लिए एक विशेष प्रकार के पदार्थ का छिड़काव होता है. वृक्ष को पोषक तत्व देने के लिए मिनरल्स का लेप चढ़ाते हैं. 2007 से ही इसकी सेहत का ध्यान रखा जा रहा है. इसको छूने पर प्रतिबंध है. 
बोधगया टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी के सचिव नंजे दोरजे ने बताया कि देहरादून से भारतीय वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक इसका चेकअप करने आते हैं.
वृक्ष सहित मंदिर की देखभाल पर हर साल 5 लाख रुपए खर्च किए जाते हैं. चार डोर मेटल डिटेक्टर 10 हैंड मेटल डिटेक्टर और 50 सीसीटीवी कैमरे से इसकी निगरानी की जा रही है.
24 घंटे बिहार मिलिट्री पुलिस के 360 जवान करते हैं इसकी सुरक्षा 
साल 2007 में जब इस वृक्ष का डीएनए टेस्ट हुआ तो पता चला कि यह उसी वृक्ष की जड़ से निकला है, जिसके नीचे बैठकर सिद्धार्थ (महात्मा बुद्ध) को ज्ञान प्राप्त हुआ था.
source zee news

मुंबई : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सुप्रीमो राज ठाकरे पर यह कहते हुए तंज कसा कि बिहार के लोग किसी पर बोझ नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था कि मुंबई में बिहार स्थापना दिवस समारोह का विरोध किया जाता था. नीतीश ने हालांकि, राज ठाकरे का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा स्पष्ट रूप से मनसे प्रमुख की तरफ था. मैथिली समन्वय समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहारियों ने देश में हर जगह अपने ज्ञान और क्षमताओं से नाम कमाया.
'बिहार स्थापना दिवस का विरोध करने वाले शांत हो गए'
कुमार ने कहा, ‘देशभर के लोग बिना बिहारियों के कोई काम नहीं करा सकते. वे (बिहारी) किसी पर निर्भर नहीं हैं और न ही वे किसी पर बोझ हैं.’उन्होंने राज ठाकरे का नाम लिए बिना कहा, ‘कुछ लोगों ने यहां बिहार स्थापना दिवस का विरोध किया. अब वे शांत पड़ गए हैं.’कुमार 2012 में शहर में 100वें बिहार स्थापना दिवस समारोह मनाने के लिए मुंबई में बिहारियों के खिलाफ ठाकरे द्वारा चलाए गए अभियान का उल्लेख कर रहे थे. कुमार ने तब कहा था कि उन्हें मुंबई में आने के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं है.
हम किसी की नकल नहीं करते-नीतीश
मनसे की राजनैतिक ताकत अब काफी घट गई है. 2009 में महाराष्ट्र विधानसभा में मनसे के सीटों की संख्या 13 थी. पार्टी का अब सिर्फ एक विधायक है जबकि मुंबई नगर निगम में उसके सीटों की संख्या 28 से घटकर सात रह गई है.बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने की आवश्यकता नहीं महसूस करते. उनके राज्य में बदलाव खुद महसूस किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ‘हम किसी की नकल नहीं करते. हमारे विकास के काम को देखा जा रहा है.’समाज में आखिरी व्यक्ति तक विकास पहुंचे इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों के विकास की आवश्यकता है.’

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